Friday, October 24, 2008

फिर हिंदू कैसे आतंकवादी हो गए?

ज्यादा दिन नहीं हुआ है जब मीडिया और बुद्धिजीवियों का एक बड़ा तबका कह रहा था कि आतंकवाद को इस्लाम से जोड़कर न देखा जाए। आतंकवादियों को कोई मजहब नहीं होता है। वैसे यहां तक तो मैं भी मीडिया और बुद्धिजीवियों की राय से सहमत हूं। लेकिन ये सारे तर्क और विवेकपूर्ण बातें धरी रह गईं जब मालेगांव और साबरकांठा विस्फोट में हिंदू आरोपी बनाए गए। कल तक चीख-चीखकर संयमी और विवेकी बनने की नसीहत देने वाले लोग अब अपना उपदेश ही भूल गए हैं। अब उसी मीडिया में हेडिंग लगा रही है- Millitant Hindu activists held for malegaon blasts. कुछ और सुर्खियां हैं - Hindu group behind Malegaon, Modasa Ramzan blast, Hindu terror link to malegaon blast.


इन धमाकों की साजिश करनेवाले अगर हिंदू हैं, तो दूसरे मामलों की तरह ही कानून अपना काम करेगा और सजा देगा। इसमें 'दूसरे संप्रदाय' के विपरीत हिंदुओं को कोई आपत्ति भी नहीं होगी। आरोपियों का नाम सामने आते ही 'हिंदू हितों के पैरोकारों' ने आगे आकर सराहनीय बयान दिया है। इसके बावजूद मीडिया और बुद्धिजीवियों के उस बड़े तबके का आतंकवाद व धर्म के संबंध पर सुर बदल गए हैं, पर सवाल उठता है क्यों? शायद इसके पीछे भी वही मानसिकता है कि बहुसंख्यकों की भावनाओं से जब चाहो खिलवाड़ कर लो, परवाह कौन करता है।

8 comments:

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

भैये यही है धर्मनिरपेक्षता,
यदि हिन्दू करे तो नाम कि हिन्दू ने किया और यदि गैर-हिन्दू करे तो कहा जायेगा कि धर्म-विशेष के लोगों ने किया है. अब कहा जा रहा है कि हिन्दू "भी" आतंकवादी है. क्या कोई बतायेगा कि ये "भी" का अर्थ?

Satyajeetprakash said...

एनडीटीवी देखो, विनोद दुआ सौ बार रटते मिलेंगे मुख में राम, बगल में बम. विनोद दुआ कि हिम्मत है कि वह मुसलमानों को लिए ऐसा कहकर दिखाए. एनडीटीवी हिंदू प्रतीक चिंह्न बनाकर हिंदु आरोपियों के नाम गिनाता है,, है हिम्मत कभी कि मुसलमानों के कुरान के इस रूप में प्रयोग करें. आरोपी कोर्ट पहुंचा नहीं कि उसे आतंकवादी घोषित कर दिए जो तब अफजल का नाम लेते ही सांप सूंघ जाता है.

''ANYONAASTI '' said...

हिन्दुवत का सबसे बड़ा दुर्गुण इसका सहिष्णु होना है सहनशीलता है एवं सहस्तित्व में विश्वास करना है और वह कहावत तो सुनी ही होगी कि सीधे का मुह कु .........चाटे |

संजय बेंगाणी said...

हिन्दू आतंकवादी के नाम के साथ बेशर्म विनोद दूआ का सर शर्म से एक ही बार में झूक गया था, जो अब तक नहीं झूका था. शायद इस्लामि आतंकवाद शर्म की बात नहीं दूआ के लिए.

मिहिरभोज said...

सही है बाकि सैकङो बम फूटें और हजारों की जान जायें लाखों पलायन कर जायें. तो सिर्फ आतंकवाद पर एक घटना जिसमें किसी को हिंदुओं पर अंगुली उठाने का मौका मिला तो हिंदु आतंकवाद ...चलो क्यों न इस बहाने अफजल को छोङ दिया जाये...सिमी पर प्रतिबंध हटा लिया जाये और हो सके तो उन्हें थोङी बहुत सरकारी सहायता भी दिलादी जाये ...बङा मजा आयेगा

indrani said...

agar kisi hindoo ne (vaise mujhe nahi lagta, ho sakta hai ki jabardasti lapeta ja raha ho) kar diya to hindoo aatankvadi aur bhagwa bam ho gaya, muslim aatankvaadi aur hara bam ya kuran-sharif ke oopar aisa likhenge to inhi ka sar kalam ho jaayega isliye vinod dua jaise log aisa hi karenge

E-Guru Rajeev said...

हिन्दुवत का सबसे बड़ा दुर्गुण इसका सहिष्णु होना है सहनशीलता है एवं सहस्तित्व में विश्वास करना है और वह कहावत तो सुनी ही होगी कि सीधे का मुह कु .........चाटे |

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

निर्दोषों की जान लेने वाले को सज़ा मिलनी चाहिए - हिंदू हो या मुसलमान या ईसाई या पूर्ण-नास्तिक!