इंडोनेशिया में हाल ही में लागू किए गए अश्लीलता विरोधी कानून (बैन बिकनी बिल) का विरोध देश के कई हिस्सों में इन दिनों जोरों पर है। खासकर बाली में, जहां 93 प्रतिशत आबादी हिंदुओं की है। बाली में इस कानून का विरोध होने की कई वजहें हैं। यह कि सूबा देश का सबसे चर्चित पर्यटन स्थल है, जाहिर है जो लोग बाहर से आते हैं वह समुद्र किनारे बुर्का पहनकर तो नहीं घूमेंगे! स्थानीय लोगों को डर है कि कट्टरपंथी मुस्लिमों को खुश करने के लिए बनाए गए इस कानून के डर से कहीं पर्यटक यहां आने से ही ना डरने लगें। और अगर ऐसा हुआ तो निश्चित रूप से उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा।इस कानून का इससे भी खतरनाक पहलू यह है कि इससे हिंदुओं की कई धार्मिक गतिविधियों पर रोक लग सकती है। हिंदुओं को लग रहा है कि नए कानून से उनका धर्म खतरे में पड़ जाएगा। इस कानून के अनुसार हिंदू धर्म के लोग भगवान शिव की पूजा खुलेआम नहीं कर पाएंगे, क्योंकि कुछ लोगों के अनुसार शिवलिंग की पूजा नग्नता का सामाजिक स्तर पर प्रदर्शन है। इसलिए उस पर पाबंदी लगाना जरूरी है। यही नहीं, इस कानून के लागू होने से 'ओम ज्योतिर्लिन्गाय नम:' जैसे संस्कृत के मंत्र भी अश्लीलता की श्रेणी में आ सकते हैं।
इंडोनेशिया में यह शंका जताई जा रही है कि अश्लीलता पर रोक की आड़ में इस्लाम के शरिया कानूनों को देश की गैर मुस्लिम आबादी पर थोपने का प्रयास किया जा रहा है। कई बार पहले भी ऐसे कट्टरपंथी लोगों ने इस्लाम की रक्षा के नाम पर वहां के तमाम होटलों और नाइट क्लबों पर धावा बोला था और इस तरह लोगों में दहशत फैलाने की कोशिश की थी।
इस मसले पर नवभारत टाइम्स में गुरुवार को लेख छपा है, 'बाली में यह कैसा तूफान'